60+ Best Breakup Shayari In hindi | बेस्ट ब्रैकअप शायरी इन हिंदी

नमस्कार दोस्तों आप हम आपके लिए Breakup Shayari In hindi मे लेकर आए है। जो आपको अच्छी लगेंगी अगर आपका दिल टूटा या आपका ब्रैकअप हूआ है और आप ब्राकुओ शायरी इन 2 लाइन मे ख़ोज रहे है तो आप सही जगाह पर आए हो।

ब्रैकअप एक ऐसी चीज है जो होता है तो बहुत दुख होता है और बहोत आफसोस होता है। हम आपके लिए सबसे अच्छी ब्रैकअप शायरी इन हिंदी मे लेकर आए है। अग़र आपको इनमे से कोई भी शायरी अच्छी लगे तो आप कॉपी करके स्टेटस मे रख सकते है। अगर आपको यह पेज अच्छा लगे तो अपने दोस्तों को भेजना ना भूले।

Breakup Shayari In hindi

बेवफ़ा तेरा मुस्कुराना भी झूठ था,
ख्वाब समझ के हम हर ग़म भूलते रहे।

तुझसे बिछड़ कर अब जी नहीं पाते,
तेरे बिना हर लम्हा बहुत रुलाते।

मोहब्बत अधूरी थी, ख्वाब भी टूटे हुए,
अब तो अश्क भी हँसी में छुपे हुए।

दिल तोड़ कर मुस्कराना आदत बन गई है,
अब तो दर्द में भी राहत बन गई है।

तू दूर हो गया लेकिन यादें साथ हैं,
तेरे बिना भी अब तेरे ही जज़्बात हैं।

ना कोई शिकवा, ना कोई मलाल रखते हैं,
अब तो बस तन्हाई से ही प्यार करते हैं।

एक तेरे जाने से सब कुछ बदल गया,
सपनों का शहर जैसे उजड़ गया।

हमने तो चाहा था तुझे हर हाल में,
तूने तो छोड़ा हमें सवाल में।

सब कुछ था मेरे पास, तेरे सिवा,
अब कुछ भी नहीं तेरे जाने के बाद।

इश्क़ अधूरा सही, पर सच्चा था,
तू बेवफ़ा सही, पर पहला था।

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हर दर्द में बस तेरा नाम लिया,
तेरे ही ग़म को अपना काम किया।

छोड़ दिया हमने तेरा शहर भी,
जहाँ हर मोड़ पे तेरी याद आती थी।

मोहब्बत अब किताबों में ही अच्छी लगती है,
हक़ीकत में तो बस दर्द ही देती है।

अब दिल से नहीं दिमाग से प्यार करते हैं,
सबक जो तुझसे मिला है।

जाने वाले से क्या शिकायत करें,
जिसे रहना ही नहीं था वो रुका भी नहीं।

तेरा मिलना तो किस्मत में था ही नहीं,
वरना कोशिश तो बहुत की थी।

ना तू मिला ना तेरा जवाब आया,
बस खाली दिल का ख़्वाब आया।

अब वो बातें भी याद नहीं आतीं,
जो तेरे बिना हर वक़्त रुलाती थीं।

तुमसे जुदा होकर भी जिंदा हैं,
मगर हर रोज़ थोड़े-थोड़े मरते हैं।

जब तू था, तो हर दर्द आसान था,
अब तू नहीं, तो हर साँस परेशान है।

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वक़्त ने तुझसे दूर कर दिया,
वरना तुझसे जुदा होना आसान नहीं था।

ख्वाब थे पर पूरे ना हुए,
तेरे मेरे रास्ते अलग ही हुए।

मोहब्बत अब एक मज़ाक बन गई,
जिस पर दिल हर रोज़ रोता है।

तन्हाई ही अब सबसे बड़ी साथी है,
तेरे बाद ये ज़िन्दगी अधूरी सी लगती है।

अब तुझसे मोहब्बत नहीं रही,
अब तो सिर्फ़ खुद से सवाल बाकी हैं।

तेरे साथ बिताए लम्हें अब किताब हो गए,
पढ़ते हैं रोज़, पर जी नहीं पाते।

अब तेरा नाम भी नहीं लेते,
क्योंकि दर्द सहना आ गया है।

दिल टूटा, जुड़ा नहीं अब तक,
तेरे बिना सब अधूरा सा लगता है।

कभी सोचा ना था तू छोड़ देगा,
अब सोचते हैं कोई और धोखा ना दे।

ना जिया जाता है तेरे बिना,
ना ही मरा जाता है इस ग़म के साथ।

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तू साथ नहीं फिर भी पास है,
हर साँस में बस तेरा एहसास है।

चुपके से आकर इस दिल में उतर गया,
तेरे जाने के बाद अब ये दिल खाली सा लग रहा।

हमसे बिछड़ कर शायद तू खुश है,
पर हमें आज भी तेरी कमी खलती है।

तेरे बिना अधूरा सा लगता है हर दिन,
जैसे चाँद बिना रात, जैसे साँस बिना जीवन।

वक़्त से पहले और मुक़द्दर से ज़्यादा,
ना कभी किसी को कुछ मिला है, ना मिलेगा।

अब शिकवा नहीं तुझसे बेवफाई का,
क्योंकि उम्मीद ही गलत थी तुझसे वफ़ा की।

हमने उसे चाहा दिल से,
और उसने हमें छोड़ा दिल तोड़ कर।

मोहब्बत करके जो ग़म मिला,
अब हर ख़ुशी से डर लगता है।

तुमसे मोहब्बत की थी,
अब नफरत भी नहीं होती।

रिश्ता तोड़ना आसान होता है,
मगर यादें तो हमेशा के लिए रह जाती हैं।

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अब तन्हा रहने का आदत सी हो गई है,
तेरे बिना जीने की आदत बन गई है।

खो दिया तुझे कुछ इस तरह,
जैसे खुद को ही खो दिया हो।

तेरा जाना भी जरूरी था,
ताकि हमें खुद से मिलने का वक़्त मिले।

किसी और के साथ तेरा हँसना,
हमारी जान ले गया चुपचाप।

इश्क़ अधूरा सही, पर सिखा गया बहुत कुछ,
खुद से कैसे प्यार करते हैं।

अब ना तेरे आने की ख्वाहिश है,
ना तुझे खोने का ग़म।

तुमसे इश्क़ करके हम खुद को भूल गए,
अब खुद से मिलने की कोशिश में हैं।

तेरा नाम अब भी दिल से निकलता नहीं,
जैसे सांसों में घुल गया हो।

बिछड़ के भी ना बिछड़े तुम,
तेरी यादें अब भी साथ चलती हैं।

हर ख्वाब अब तुझसे दूर कर दिया,
क्योंकि नींदें अब भरोसेमंद नहीं रहीं।

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मोहब्बत भी अब किताबों में अच्छी लगती है,
हकीकत में तो बस धोखा ही मिलता है।

अब वो ज़िंदगी रही नहीं जिसमें तेरा नाम था,
अब तो बस साँसें हैं और तन्हाई का काम है।

जिसने जितना चाहा, उतना टूटा,
ये इश्क़ का गणित बहुत अजीब है।

मैं रोया नहीं, बस खामोश हो गया,
तेरे जाने के बाद हर जज़्बा सो गया।

जब भी किसी से दिल लगाना चाहा,
तेरी याद ने फिर से रुला दिया।

तुमसे बिछड़ कर सीखा है जीना,
वरना तो साँसें भी तेरे नाम की थीं।

अब तो अल्फाज़ भी साथ नहीं देते,
तेरे ग़म को कैसे बयां करूँ?

कभी हम भी तेरे लिए खास थे,
अब तो याद भी नहीं आते।

हमसे दूर जाकर भी वो हमारे ही थे,
हम पास रहकर भी अजनबी थे।

किसी और का नाम जुबां पर ना आए,
इसीलिए तेरा नाम लेना छोड़ दिया।

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